एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र तिथि है। इस दिन उपवास का मुख्य उद्देश्य केवल भोजन छोड़ना नहीं, बल्कि इंद्रिय-संयम, भगवान का स्मरण और मन को भक्ति में लगाना है।
फिर भी एकादशी को लेकर सबसे अधिक प्रश्न भोजन को लेकर ही होते हैं — चावल, गेहूं, दाल खा सकते हैं या नहीं? नमक का क्या नियम है? कुट्टू, सामक और साबूदाना फलाहार में आते हैं या नहीं? आइए शास्त्रों के अनुसार यह मूल नियम समझते हैं।

एकादशी में अन्न क्यों नहीं खाना चाहिए?
नारद पुराण के पूर्वार्ध, अध्याय 23 में एकादशी के संबंध में अन्न-त्याग का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
यानि कानि च पापानि ब्रह्महत्यादिकानि च ।
अन्नमाश्रित्य तिष्ठन्ति तानि विप्र हरेश्वर ।।
आगे कहा गया है —
एकादश्यां निराहारो यदि मुक्तिमभीप्सति ।।
अर्थात् एकादशी के दिन अन्न के संबंध में विशेष निषेध बताया गया है और एकादशी को उपवास करने की महिमा कही गई है। इसी कारण एकादशी में सामान्य अन्न और धान्य का त्याग इसकी प्रमुख परंपराओं में है।
एकादशी में कौन-कौन से अन्न नहीं खाने चाहिए?
सामान्य अन्न-त्याग के अंतर्गत मुख्य रूप से इनसे बचा जाता है:
- चावल
- गेहूं और गेहूं का आटा
- जौ
- सामान्य दालें
- उड़द
- मसूर
- चना आदि सामान्य धान्य/दलहन
प्राचीन धर्मशास्त्रीय व्रत-नियमों में भी विभिन्न धान्यों और व्रत में त्याज्य पदार्थों का उल्लेख मिलता है। अग्निपुराण के व्रत-परिभाषा अध्याय में भी व्रत के दौरान अनेक खाद्य पदार्थों के त्याग का निर्देश है।
इस विषय पर विस्तृत लेख जल्द आ रहे हैं:
→ एकादशी में चावल क्यों नहीं खाते?
→ एकादशी में गेहूं, आटा और दाल खा सकते हैं या नहीं?
एकादशी में क्या खा सकते हैं?
व्रत की पद्धति के अनुसार भोजन अलग-अलग हो सकता है। सामान्य फलाहारी परंपरा में मुख्य रूप से इनका प्रयोग किया जाता है:
- फल
- दूध
- जल
- मूल/कंद
- मेवे
- मखाना
- परंपरा के अनुसार कुट्टू, सिंघाड़ा, सामक आदि
लेकिन कुट्टू, सामक, साबूदाना आदि को लेकर अलग-अलग क्षेत्रीय और सम्प्रदायिक परंपराएं हैं, इसलिए इनके लिए अलग-अलग नियमों को समझना जरूरी है।
विस्तृत लेख जल्द आ रहे हैं:
→ एकादशी में कुट्टू खाना चाहिए या नहीं?
→ एकादशी में सामक/भगर क्या है?
→ एकादशी में साबूदाना खाना चाहिए या नहीं?
एकादशी में नमक खाना चाहिए या नहीं?
नमक को लेकर अलग-अलग व्रत-परंपराएं मिलती हैं। कुछ लोग निर्लवण व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहारी परंपराओं में सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है।
धर्मशास्त्रीय व्रत-नियमों में नमक-त्याग का उल्लेख भी मिलता है। अग्निपुराण, अध्याय 175 में कहा गया है —
क्षारं क्षौद्रं च लवणं मधु मांसानि वर्जयेत् ।
अर्थात् व्रत में क्षार, लवण, मधु और मांस आदि के त्याग का निर्देश दिया गया है। इसलिए नमक का विषय केवल "साधारण नमक बनाम सेंधा नमक" का प्रश्न नहीं है; कठोर निर्लवण व्रत भी एक शास्त्रीय व्रत-पद्धति है।
विस्तृत लेख जल्द आ रहा है:
→ एकादशी में नमक खाना चाहिए या नहीं? सेंधा नमक भी वर्जित है?
क्या एकादशी में दूध और फल ले सकते हैं?
व्रत-साहित्य में जल, मूल, फल और दूध आदि को व्रत के संदर्भ में स्वीकार्य पदार्थों में गिना गया है। प्रसिद्ध श्लोक है —
अष्टौ तान्यव्रतघ्नानि आपो मूलं फलं पयः ।
हविर्ब्राह्मणकाम्या च गुरोर्वचनमौषधम् ॥
इसमें जल, मूल, फल, दूध और औषधि सहित आठ बातों का उल्लेख है। इसलिए फल और दूध आधारित उपवास एकादशी की महत्वपूर्ण व्रत-पद्धतियों में आता है।
क्या एकादशी में दवा ले सकते हैं?
हाँ। ऊपर दिए श्लोक में औषधम् अर्थात् औषधि का स्पष्ट उल्लेख है। इसलिए आवश्यक दवा को केवल व्रत टूटने के डर से बंद करना उचित नहीं है।
यदि किसी व्यक्ति की कोई नियमित चिकित्सा चल रही है, तो अपनी चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार दवा लेना प्राथमिकता होनी चाहिए।
विस्तृत लेख जल्द आ रहा है:
→ एकादशी में दवा ले सकते हैं या नहीं? शास्त्र क्या कहते हैं?
क्या एकादशी में चाय और कॉफी पी सकते हैं?
चाय और कॉफी आधुनिक पेय हैं, इसलिए प्राचीन शास्त्रों में इनके नाम से कोई सीधा नियम नहीं मिलता। फिर भी यदि एकादशी का उद्देश्य उपवास, इंद्रिय-संयम और भगवान का स्मरण है, तो चाय-कॉफी को आवश्यक फलाहार मानने का कोई आधार नहीं है। विशेष रूप से कठोर व्रत रखने वाले साधक इनसे बचना पसंद करते हैं।
विस्तृत लेख जल्द आ रहा है:
→ एकादशी में चाय और कॉफी पी सकते हैं या नहीं?
एकादशी में क्या खाएं और क्या न खाएं? संक्षिप्त सूची
चावल
❌ त्याज्यगेहूं/आटा
❌ त्याज्यसामान्य दालें
❌ त्याज्यफल
✅ फलाहार मेंदूध
✅ व्रत-साहित्य में अनुमतजल
✅ सर्वथा अनुमतमूल/कंद
✅ व्रत-परंपरा मेंकुट्टू
⚠️ परंपरा के अनुसारसामक/भगर
⚠️ परंपरा के अनुसारसाबूदाना
⚠️ आधुनिक परंपरानमक
⚠️ व्रत-पद्धति पर निर्भरऔषधि
✅ आवश्यक होने परएकादशी व्रत का वास्तविक उद्देश्य
एकादशी को केवल यह सोचकर नहीं रखना चाहिए कि "आज क्या खा सकता हूं?" व्रत का वास्तविक उद्देश्य है — भोजन में संयम, इंद्रियों पर नियंत्रण, भगवान विष्णु का स्मरण और सात्त्विक जीवन।
इस दिन हरिनाम-जप, भगवान की पूजा, कथा-श्रवण, गीता/भागवत का पाठ, दान और सेवा जैसे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। इसलिए एकादशी का सार केवल अन्न-त्याग नहीं, बल्कि हरि-स्मरण है।
निष्कर्ष
शास्त्रीय एकादशी-व्रत का मूल नियम सामान्य अन्न और धान्य का त्याग है। चावल, गेहूं और सामान्य दालें इसी कारण वर्जित मानी जाती हैं। फल, दूध, जल और कुछ अन्य पदार्थ व्रत-पद्धति के अनुसार ग्रहण किए जाते हैं।
वहीं कुट्टू, सामक, साबूदाना, सेंधा नमक आदि के नियमों में क्षेत्र, परिवार और सम्प्रदाय के अनुसार अंतर मिलता है। इसलिए हर फलाहारी पदार्थ को एक समान "शास्त्र का सार्वभौमिक नियम" मानना उचित नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण बात — एकादशी केवल भोजन का व्रत नहीं, भगवान के निकट रहने का दिन है। भोजन कम हो, मन में हरि-नाम अधिक हो — यही इस पवित्र व्रत की भावना है।

