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Parivartini Ekadashi

परिवर्तिनी एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि — सामग्री, संकल्प, मंत्र और पंचोपचार पूजा

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने की विशेष महिमा बताई गई है। यदि घर में भगवान वामन की अलग प्रतिमा उपलब्ध न हो, तो शालिग्राम भगवान के समक्ष पूजा की जा सकती है। शालिग्राम न हों तो सुपारी को भगवान के प्रतीक रूप में स्थापित करके भी पूजा की जा सकती है।

इस पूजा में बहुत बड़े कर्मकांड से अधिक श्रद्धा, भक्ति और भाव को महत्व दिया गया है। इसलिए घर में उपलब्ध सामग्री से भी सरल तरीके से भगवान वामन का पूजन किया जा सकता है।

परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि सामग्री

परिवर्तिनी एकादशी पूजा के लिए सामग्री

सरल पंचोपचार पूजा के लिए अपनी सुविधा के अनुसार यह सामग्री रखें:

  • शालिग्राम भगवान या एक सुपारी
  • जल
  • शंख, यदि उपलब्ध हो
  • तिलक की सामग्री
  • पुष्प
  • धूप
  • दीपक
  • फल का भोग
  • दूध और दही, उपलब्ध हो तो

शंख उपलब्ध न हो तो चम्मच से भी जल अर्पित किया जा सकता है।

पूजा से पहले परिवर्तिनी एकादशी का संकल्प

सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर बैठकर भगवान विष्णु का स्मरण करें और परिवर्तिनी एकादशी व्रत का संकल्प लें।

संकल्प में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अपना नाम, गोत्र और व्रत का उद्देश्य बोल सकते हैं:

श्री विष्णु, श्री विष्णु, श्री विष्णु।
मम नाम ________, मम गोत्र ________।
अहं परिवर्तिनी एकादशी व्रतम् करिष्ये।
श्री विष्णु प्रीत्यर्थं व्रतं करिष्ये।

इसके बाद भगवान से प्रार्थना करें कि वे आपके व्रत और पूजा को स्वीकार करें।

वामन भगवान की स्थापना कैसे करें?

यदि आपके घर में शालिग्राम भगवान हैं, तो उनके समक्ष भगवान वामन का पूजन करें।

यदि शालिग्राम उपलब्ध नहीं हैं, तो एक सुपारी को स्वच्छ स्थान पर फूलों के ऊपर स्थापित करके भगवान के प्रतीक रूप में पूजा कर सकते हैं।

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भगवान वामन का स्नान कैसे कराएं?

स्थापना के बाद भगवान को स्नान कराएं। शंख में जल लेकर धीरे-धीरे भगवान को अर्पित करें। शंख उपलब्ध न हो तो चम्मच से भी जल चढ़ाया जा सकता है।

स्नान कराते समय यह स्नान मंत्र बोलें:

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले’स्मिन् सन्निधिं कुरु।

सरल अर्थ: हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी! आप सभी पवित्र नदियां इस जल में अपना पावन सान्निध्य प्रदान करें।

यदि दूध और दही उपलब्ध हों तो उनसे भी स्नान करा सकते हैं। इसके बाद भगवान को स्वच्छ जल से स्नान कराएं। यदि ये सामग्री उपलब्ध न हों, तो केवल जल से स्नान भी किया जा सकता है।

स्नान के बाद करें पंचोपचार पूजा

भगवान का स्नान कराने के बाद पंचोपचार पूजा करें। पंचोपचार में पांच मुख्य अर्पण किए जाते हैं:

1. तिलक

सबसे पहले भगवान को तिलक लगाएं और भगवान विष्णु का स्मरण करें।

2. पुष्प

भगवान के चरणों में श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित करें।

3. धूप

धूप जलाकर भगवान को अर्पित करें।

4. दीप

दीपक जलाकर भगवान को दीप दिखाएं।

5. फल का भोग

एकादशी के दिन भगवान को फल का भोग लगाएं। आपके पास जो भी फल उपलब्ध हों, उन्हें श्रद्धा से भगवान को अर्पित कर सकते हैं।

इस प्रकार तिलक, पुष्प, धूप, दीप और फल-भोग के साथ पंचोपचार पूजा पूरी हो जाती है।

पूजा के दौरान कौन-से मंत्र बोलें?

पूजा के दौरान भगवान विष्णु का नाम-स्मरण कर सकते हैं:

ओं नमो भगवते वासुदेवाय।
ओं नमो नारायणाय।

मंत्र जाप करते हुए भगवान वामन का ध्यान करें और अंत में श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।

पूजा के बाद पढ़ें परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा

पूजा और व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और उसके बाद परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।

कथा 4ड़िते या सुनते समय भगवान विष्णु का ध्यान करें और श्रद्धा से कथा का श्रवण करें।

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शाम को क्या करें?

यदि संभव हो तो शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं।

इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अपना समय भक्ति में लगाना उत्तम माना गया है।

परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि — एक नजर में

स्नान → व्रत का संकल्प → शालिग्राम/सुपारी की स्थापना → स्नान मंत्र से अभिषेक → तिलक → पुष्प → धूप → दीप → फल का भोग → मंत्र जाप → व्रत कथा का पाठ/श्रवण → आरती → तुलसी के पास दीप → प्रार्थना

निष्कर्ष

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप का पूजन श्रद्धा और सरल भाव से किया जा सकता है। वामन भगवान की प्रतिमा न होने पर शालिग्राम या सुपारी को प्रतीक रूप में स्थापित करें। संकल्प लेने के बाद स्नान मंत्र से जल अर्पित करें और फिर तिलक, पुष्प, धूप, दीप तथा फल का भोग लगाकर पंचोपचार पूजा करें।

इसके बाद परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें और शाम को भगवान विष्णु की आरती करके तुलसी के पास दीपक जलाएं।

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