परिवर्तिनी एकादशी पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, छाता और जूते आदि का दान अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है। शास्त्रों में विशेष रूप से जल से भरा घड़ा, वस्त्र, दही-चावल, छाता और जूते दान करने का उल्लेख मिलता है।

परिवर्तिनी एकादशी पर क्या दान करें?
1. जल से भरा हुआ घड़ा
एकादशी पर जल से भरे हुए घड़े को वस्त्र से ढककर दान करने की परंपरा बताई गई है।
आज के समय में यदि घड़ा दान करना व्यावहारिक न हो, तो आप एसा स्थान बना सकते हैं जहां पक्षी और पशु आसानी से पानी पी सकें। किसी वृक्ष के नीचे पानी की व्यवस्था करना भी इसी भाव से किया जा सकता है।
इसके लिए केवल पीपल का पेड़ ही आवश्यक नहीं है — एसा स्थान चुनें जहां पशु-पक्षियों को वास्तव में पानी मिल सके।
2. अन्न और चावल का दान
परिवर्तिनी एकादशी पर अन्न और चावल का दान भी किया जा सकता है।
एकादशी के दिन चावल खाने से बचने की परंपरा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि चावल को छुआ या दान किया ही नहीं जा सकता। चावल खाने के लिए वर्जित माना जाता है, दान करने के लिए नहीं।
इसलिए कच्चे चावल या पके हुए चावल का जरूरतमंद व्यक्ति अथवा उचित स्थान पर दान किया जा सकता है। पशु-पक्षियों के लिए अन्न की व्यवस्था भी की जा सकती है।
3. दही और चावल का दान
दही और चावल के दान का भी उल्लेख मिलता है। यदि आप दही-चावल का दान करना चाहते हैं, तो अपनी सुविधा के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को दे सकते हैं।
यह बात ध्यान रखें कि एकादशी पर चावल का सेवन न करने और चावल का दान करने में अंतर है।
4. वस्त्र का दान
जल से भरे घड़े को वस्त्र से ढककर दान करने का उल्लेख है। इसके अलावा जरूरतमंद व्यक्ति को वस्त्र का दान भी अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।
5. छाता और जूते का दान
परिवर्तिनी एकादशी पर छाता और जूते जरूरतमंद व्यक्ति को दान करने का भी उल्लेख मिलता है। दान हमेशा एसी वस्तु का करना बेहतर है जिसका सामने वाले के लिए वास्तविक उपयोग हो।
दान करने से पहले कौन-सा मंत्र पढ़ें?
दान से पहले भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह मंत्र बोला जा सकता है:
नमो नमस्ते गोविंद, नमो नमस्ते गोविंद।
बुद्धश्रवणसंज्ञक, बुद्धश्रवणसंज्ञक।
अघौघ संशयं कृत्वा, सर्वसौख्यप्रदो भव।
सरल भावार्थ: हे गोविंद, हे प्रभु! आपको बार-बार नमस्कार है। आप मेरे सभी पापों के समूह का नाश करके मुझे सभी प्रकार का सुख प्रदान करें।
दान करने से पहले श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का पाठ किया जा सकता है। यदि संस्कृत मंत्र का उच्चारण कठिन लगे, तो उसके भाव को मन में रखकर भगवान से प्रार्थना भी की जा सकती है।
परिवर्तिनी एकादशी पर दान कैसे करें?
दान करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और सेवा का भाव है। जल का दान करते समय एसी जगह पानी रखें जहां पशु-पक्षी उसका उपयोग कर सकें। अन्न या वस्त्र का दान जरूरतमंद व्यक्ति को करें और अपनी क्षमता के अनुसार सेवा करें।
दान का उद्देश्य केवल वस्तु देना नहीं, बल्कि सेवा और परोपकार की भावना रखना है।
परिवर्तिनी एकादशी दान — एक नजर में
जल से भरा घड़ा + वस्त्र → अन्न/चावल → दही → छाता → जूते → जरूरतमंदों और पशु-पक्षियों की सेवा
दान से पहले भगवान का स्मरण करें और ऊपर दिया गया मंत्र पढ़कर श्रद्धापूर्वक दान करें।
निष्कर्ष
परिवर्तिनी एकादशी पर जल, अन्न, चावल, दही, वस्त्र, छाता और जूते जैसे दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार किए जा सकते हैं। जलदान के लिए पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी एक सरल विकल्प है। दान करते समय भगवान का स्मरण करें और श्रद्धा से दान करें।
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